Saturday, 28 June 2014

KAJRARE BAADAL (DARK CLOUDS)

कजरारे बादल 







फिर घिर आए है कुछ कजरारे बादल 
कुछ अलसाये कुछ शरमाये बादल।

प्रियतमा धरती से मधुर मिलन की 
आस लिए मुस्काते-मदमाते बादल।

प्यासी धरती की आस जगाते 
सौम्य सलोने प्यारे बादल। 

नटखट बच्चों का ध्यान बटांते 
ललचाते हर्षाते बादल।

चंचला-दामिनी को संग लिए 
गर्जन शोर मचाते बादल। 

शीतल बयार का साथ लिए  
गीली मिट्टी की सोंधी खुशबू उड़ाते बादल। 

अरुणिमा को शेष बनाते 
भूरे-नीले-काले बादल। 

किसान की आशा तो कुम्हार की निराशा,
पल-पल रंग बदलते बादल !  




    

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