Friday, 11 October 2013

Chhui Mui Si Baarish

छुई -मुई सी बारिश 




छुई-मुई सी बारिश,
है शायद कोई नयी ख़्वाहिश,
चंचल-शीतल स्वच्छंद बयार,
अलसाये नैनों में सपने हज़ार.  



कर रहा सूरज एक अस्फुट प्रयास,
अरुणिमा का है बस मध्धम आभास,
नभ का मुक्त अट्टहास, पंछी कर रहे हास-परिहास,
पुलकित ह्रदय में आज नवीन उल्लास. 



धुला -धुला सा है सारा परिवेश,
कजरारे मेघों  ने भेजा मदमस्त सन्देश,
बच्चे बोले, ' मम्मा , हो जाए गरमा-गरम पकौड़े आज,
मैं बोली, 'नहीं-नहीं, बहुत महँगे हो गए आलू-प्याज़।






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